-: चाचा-भतीजा :-
.
गाँव में हर कोई किसी न किसी रिश्ते से बंधा होता है. कोई हमारी दादी की उम्र की भौजी लगती है तो कोई हमारी भौजी की उम्र की दादी . कोई पापा के उम्र का भैया लगता है तो कोई मेरे से १० साल छोटा मेरा दादा . और ऐसे ही हमउम्र में भी रिश्ते होते हैं . लेकिन चाचा भतीजे के जो रिश्तें होते हैं ना वो बड़े अनोखे होते हैं . मतलब हमेशा माँ-मौसी वाली, रिश्तें में जो चाचा लगता हैं वो हमेशा भतीजे के ऊपर माँ-मौसी के बाउंसर मारता रहता हैं और भतीजा बिल्कुल भी बल्ला नहीं चलाता . दस साल का चाचा मेरी माँ-मौसी की ऐसी-तैसी कर देता हैं मजाक-मजाक में और मैं बस मुस्कुरा के रह जाता हूँ .वे पुरे हक़ के साथ गालियाँ देते है और हम भतीजे भी उनका हक़ समझ कर जाने देते है. अगर कभी थोड़ी-बहुत कहा-सुनी हुई तो वो ये जताने में ज़रा सा संकोच नहीं करते कि- ‘अबे हम तुम्हारे चाचा लगते है चाचा, चाचा का मतलब समझते हो न ‘. और बस बात ख़त्म और ठहाके शुरू .
.
ऐसे ही हमारे गाँव में दो लड़के है , मेरे सहपाठी भी रह चुके हैं. एक लगल महतो और दूसरा गुड्डू महतो. गुड्डू महतो चाचा लगता हैं लगल महतो का और मेरा भाई. मैं एक साइकल में अकेला स्कूल जाता था और वो दोनों एक साथ में,क्योंकि लगल को याने भतीजे को साइकल चलानी नहीं आती थी. चाचा हमेशा साइकल चलाता और भतीजा पीछे कैरिअर में किताबें पकडे बैठा रहता और जब कभी भी उचक/कुद के बैठने में गड़बड़ी करता चाचा माँ-मौसी की कुंडली निकाल के रख देता. लेकिन थे बड़े पक्के दोस्त आज भी हैं,और चाचा-भतीजा वाला सिंड्रोम अभी भी कायम हैं .मुझे तब का याने स्कूल के दिनों का एक वाक्या अभी भी याद हैं.
.
हमारे गाँव से हमारा स्कूल भूषण उच्च विद्यालय,नावाडीह पांच किलोमीटर दूर है,और इस बीच में दो-तीन गाँव पड़ जाते हैं .इस पांच किलोमीटर के दरमियाँ स्कूल आने जाने के क्रम में भतीजा चाचा से नहीं तो कम से कम २०० गालियाँ माँ-मौसी की ज़रूर खाता था . और जहाँ लड़कियां देखी चाचागिरी और झाड़ देता था. ऐसे ही एक लड़की थी कटघरा गाँव की,जो कन्या उच्च विद्यालय,नावाडीह में पढ़ती थी,पैदल जाती थी. हमलोगों के स्कूल जाने के क्रम में रोज़ भेटाती थी और हमलोग भी ४-५ मिनट के लिए साइकल के पैडल कम और ब्रेक ज्यादा लगाकर के चलते थे. और जैसे ही स्पीड कम हुई चाचा की चाचागिरी शुरू. वो शुरू में तो इनकी बातों को इग्नोर करती रही लेकिन धीरे-धीरे उन्हें भतीजे पे दया आने लगी.एक दिन उस लड़की से बर्दाश्त न हुआ,उन्होंने टोक लिया-‘ये लड़का है कौन,रोज-रोज मैं देखती आ रही हूँ तुम्हे बस माँ-मौसी की गालियाँ देता रहता हैं और तुम बस सुनते जाते हो,कोई दूसरा लड़का होता तो कब की इसकी धुलाई कर दिया होता और तुम हो कि बस सुनते जा रहे हो,कौन है ये और क्या लगता है तुम्हारा.’
हमलोग तो सब सन्न रह गए,सोचने लगे अब भतीजा क्या बोलेगा......... अगले पल
भतीजा- आप इनकी बात कर रही हैं ?
लड़की –हाँ.....इसकी ,कौन है ये ???
भतीजा बड़ी मासूमियत से – ये ना ...हमारे पप्पा हैं .....
अब लड़की तो एकदम्मे अवाक और हमलोगों के मुंह से ठहाकें लेकिन इन्ही ठहाकों के बीच से चाचा भतीजे को डांट लगते हुए – ‘अरे लगला तोरी मौसी के बिहा करो जल्दी से बैठ रे, लेट हो रहा है स्कूल को नहीं तो अपत्तिया मास्टरवा सोंट के रख देगा’. कुछ देर आगे चलने के बाद चाचा बोलता है – ‘ बेटा लगल....हमें तुमपे फकर है रे...आजकल साला लड़का लोग लड़की के चक्कर में का का नहीं करता हैं और तुम लड़की का साथ न दे के हमारा साथ दिया... गर्व हैं तुमपे रे....लेकिन ये मत सोचना कि अब हम तुमको गरियाना छोड़ देंगे? हम तो जब तक रहेंगे तब तक गरियाते रहेंगे...क्यों.... क्योंकि हम तुम्हारे चाचा है चाचा... समझा ...’
लगल पीछे बैठे हुए – ‘ जी चाचू....समझ गया ‘
समय बीतता गया.....मेट्रिक की परीक्षा में दोनों सेकंड डिवीज़न से पास हुए. भतीजे की परिवारिक प्रोब्लम के चलते शादी करनी पड़ी. शादी के दिन चाचा की एक्साय्मेंट देखते ही बन रही थी-“ अरे आज हमारे बेटे का बिहा है,जिसको जितना पीना है हम पिलायेंगे रे,पूरा हिकवा भर-भर के पिलायेंगे रे.आज तो ईकर ससुरार में तो गर्दा उड़ेगा रे गर्दा”.
और हुआ ऐसा ही. पुरे बाराती का नेतृत्व गुड्डू महतो कर रहा था. नचनिया के ऊपर पैसों की बौछार और नागिन डांस के तो क्या कहने थे. जब समधी मिलन का वक़्त आया तो वर पक्ष से समधियों की कतार में सबसे आगे यही थे. ओरिजिनल समधियों के मिलन होते ही गुड्डू महतो ने लड़की के बाप को गोद में उठा के झूमर गाते हुए पुरे पांच मिनट तक डांस किया था. पुरे वधु पक्ष में चर्चा का विषय था कि ये लड़का है कौन ? किसी ने बता दिया कि ये दुल्हे का चाचा लगता हैं फिर क्या था ब्याह में दी जाने वाली गाली पूरा गुड्डूमय हो गया.
कुछ बरस और बीता गुड्डू महतो पढने के लिए बोकारो शहर चला गया और लगल अपनी गृहस्थी में लग गया. एक दिन लगल ने गुड्डू को फ़ोन किया....
लगल थरथराते हुए बोल रहा था.... – गुड्डू चा.... एक बहुत बड़ा प्रॉब्लम हो गया है
क्या हो गया रे तोरी माय के ...
मैया बहुत सीरियस है गुड्डू चा.
का बात कर रहा है लगल...क्या हुआ है रे भौजी को ??
वो ...मैया.... कुँवा में पानी खीचते समय फिसल के गिर गई, बहुते चोट लगा है,खून भी बहुते बह गया है,फुसरो के रीजनल हॉस्पिटल में भर्ती किये है,अभी तक बेहोश है......डाकटर सब बोल रहा है कि खून की सख्त ज़रुरत है...हमने और बप्पा ने तो दिए है फिर भी कम पड़ रहा है....अगर आप आ जाते तो....
अरे चिंता मत करो रे...भौजी को कुछ नहीं होगा....तोरा चाचा अभी जिंदा है रे सरीर का पूरा खून दे देंगे भौजी के खातिर, लेकिन कुछो होने नहीं देंगे ..... हम अभी आ रहे है....चिंता न करो.
फिर गुड्डू तुरंत बोकारो से कार बुक किया और रीजनल हॉस्पिटल फुसरो आ गया. और यथासंभव उसने लगल की माँ को खून दिया. ईश्वर की कृपा से लगल की माँ को होश आया और धीरे-धीरे स्वस्थ होने लगी. एक हफ्ते बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया. तब तक गुड्डू वही हॉस्पिटल में ही रहा लगल के साथ भौजी के सेवा-सुसुर्षा में.
घर आ जाने के बाद भी अगर लगल की माँ को कुछ ज़रूरत होती है तो गुड्डू तुरंत लगल को दहेज़ में मिली हीरो स्प्लेंडर प्रो को लेकर नावाडीह से सामान लाकर हाज़िर कर देता. अब लगल की माँ लगभग स्वस्थ हो चुकी है. एक दिन लगल की माँ गुड्डू को बुला के कहती है...
अरे ऐ गुड्डूवा तनिक हिया आव तो..
हां भौजी बोलिए...
अरे हमर सेवा तो बहुत कर लिया...तनिक आपन माय के भी ख्याल कर लियल करो...बेचारी से अब काम-धाम नहीं किया जाता घर-द्वार का. बोकारो में रह रहे हो कोन्हो लड़की-वडकी पटाया की नहीं? अरे बिहा कर लो अब......देखो तुम्हारे से छोटे लड़के बिहा कर के बैठे हैं गाँव में और तू बस घुमे जा रहा है...... कब करेगा बिहा ??
भौजी.....हम तो एके लड़की से बिहा करेंगे....
भौजी उत्साहित होते हुए पूंछती हैं- कौन है रे वो गुड्डूवा ?
गुड्डू थोडा आँखे तरेर के भौजी से कहता है – तोर बहिन.......
भौजी थोडा शरमाते हुए गुड्डू के पीठ में थप्पड़ मारते हुए बोलती है – अरे हट पगला कही का.....नहीं सुधरेगा तू..
गुड्डू लगल को जोर से आवाज़ लगाते हुए कहता है – अरे ये लगला....चल स्प्लेंडरवा निकाल रे...आज तोर मौसी के बिहा कर के लइए आते है.... भौजी को हमारी ख़ुशी देखे नहीं जा रहा हैं...
.
अरे अरे .....गुड्डू को पूरा पता है कि लगल के मौसी का बड़ा लड़का उनसे उम्र पुरे दस साल बड़ा है,लेकिन है तो भौजी की बहन और लगला की मौसी ना .
भौजी...भौजी होती हैं ,भौजी की बहन और प्यारी होती हैं और सबसे प्यारा होता है भतीजा...
.
गंगा महतो
खोपोली